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बिना परीक्षा सीधी भर्ती? UP पंचायती राज की नई वैकेंसी की 5 चौंकाने वाली सच्चाइयाँ

परिचय
उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए पंचायती राज विभाग की तरफ से 800 से ज़्यादा ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर (BPM) पदों पर भर्ती की खबर ने कई नौकरी चाहने वालों का ध्यान खींचा है। सबसे रोमांचक बात यह है कि इसके लिए न तो कोई परीक्षा देनी होगी और न ही कोई आवेदन शुल्क लगेगा, यानी सीधी भर्ती होगी। पहली नज़र में यह एक सुनहरा मौका लगता है, लेकिन क्या यह उतना ही शानदार है जितना दिख रहा है? इस भर्ती से जुड़ी कुछ ऐसी सच्चाइयाँ हैं जिन्हें जानना आपके लिए बेहद ज़रूरी है, और ये आपको हैरान कर सकती हैं। आइए, इस वैकेंसी की पूरी हकीकत को विस्तार से समझते हैं।
1. सबसे बड़ा आकर्षण: न कोई परीक्षा, न कोई फीस!
इस भर्ती का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी चयन प्रक्रिया है। इसमें आवेदन करने के लिए आपको कोई शुल्क नहीं देना है और न ही किसी तरह की लिखित परीक्षा से गुजरना होगा। यह उन उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी राहत है जो लंबी और महंगी परीक्षा प्रक्रियाओं से बचना चाहते हैं।
चयन पूरी तरह से मेरिट के आधार पर किया जाएगा। इसका मतलब है कि आपकी शैक्षणिक योग्यता और अंकों के आधार पर ही आपको चुना जाएगा। यह पहलू इस भर्ती को नौकरी चाहने वालों के लिए एक बहुत ही आकर्षक अवसर बनाता है, क्योंकि इसमें केवल आपकी अकादमिक योग्यता ही मायने रखेगी।
2. बड़ा ट्विस्ट: यह सरकारी नहीं, ‘आउटसोर्स’ भर्ती है
अब आते हैं इस भर्ती की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली सच्चाई पर। यह कोई स्थायी सरकारी नौकरी नहीं है, बल्कि यह एक ‘आउटसोर्स’ या संविदा पर आधारित भर्ती है। इसका मतलब है कि चयनित उम्मीदवार सीधे तौर पर पंचायती राज विभाग के कर्मचारी नहीं होंगे।
भर्ती प्रक्रिया दो अनुमोदित आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से की जाएगी:
• मेसर्स राजदीप इंटरप्राइजेज (Mesers Rajdeep Enterprises)
• मेसर्स वर्ल्ड क्लास सर्विसेज लिमिटेड (Mesers World Class Services Limited)
इसका सीधा मतलब है कि आपकी सेवा शर्तें, छुट्टियां और अन्य नियम पंचायती राज विभाग नहीं, बल्कि ये निजी एजेंसियां तय करेंगी, जिससे नौकरी की स्थिरता और लाभों पर असर पड़ता है। दूसरे शब्दों में, यह “अनुबंधन के आधार पे है” और आप चयनित होने पर एक “संविदा कर्मी” कहलाएंगे, जो सरकार के लिए एक निजी एजेंसी के माध्यम से काम करेगा।
3. वेतन का सच: उम्मीद से बहुत कम
इस भर्ती में ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर के पद के लिए प्रति माह मानदेय ₹15,101 निर्धारित किया गया है। यह एक मानदेय है, जिसमें स्थायी कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ता (DA), आवास किराया भत्ता (HRA) जैसे लाभ शामिल नहीं होते हैं। इस वेतन की सच्चाई को समझने के लिए इसकी तुलना एक स्थायी सरकारी पद से करना ज़रूरी है।
“अगर आपकी परमानेंट नौकरी रहती तो यहां पे आपको लेवल थ्री या लेवल फोर कम से कम आपकी सैलरी यहां पे मिलती जो कि यहां पे 30, 35, 40 हजार तक की सैलरी आपको देखने को मिलता है।”
यह अंतर स्पष्ट करता है कि एक स्थायी पद की तुलना में इस नौकरी में वेतन लगभग आधा या उससे भी कम है।
4. एक बड़ा ट्रेंड: उत्तर प्रदेश में आउटसोर्सिंग का बढ़ता चलन
यह भर्ती कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के बढ़ते चलन का एक हिस्सा है। यह ट्रेंड आजकल लगभग हर राज्य में देखा जा रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश में यह विशेष रूप से प्रमुख है। राज्य में स्थायी सरकारी रिक्तियां बहुत कम आ रही हैं, और पदों को भरने के लिए आउटसोर्सिंग का सहारा लिया जा रहा है।
जैसा कि विशेषज्ञ बताते हैं, जब सवाल उठता है कि खाली पद कहाँ से भरे जा रहे हैं, तो जवाब सीधा है: “बाकी पद भरे कहां से जा रहे हैं? तो वही मैंने बताया ना आउटसोर्स के माध्यम से भरे जा रहे हैं।”
5. सरकार को फायदा: कम लागत में कर्मचारी
आखिर सरकारें आउटसोर्सिंग का रास्ता क्यों अपना रही हैं? इसका सबसे मुख्य कारण लागत में कटौती करना है। इस मॉडल के माध्यम से सरकार को बहुत कम वेतन पर कर्मचारी मिल जाते हैं, जिससे उसका वित्तीय बोझ कम होता है।
सीधे शब्दों में कहें तो, “सरकार को क्या फायदा है कि कम दाम में आपको एंप्लई मिल जा रहे हैं।”
यह रणनीति सरकार के लिए भले ही फायदेमंद हो, लेकिन नौकरी करने वाले उम्मीदवार के लिए इसका मतलब कम वेतन और कम नौकरी की सुरक्षा है। यह सरकारी क्षेत्र में एक ‘स्थायी अस्थायी’ (permanent temporary) कार्यबल तैयार करता है, जो अनुभव प्राप्त करने के बावजूद स्थायी कर्मचारियों वाले लाभों से वंचित रहता है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग की यह भर्ती निश्चित रूप से एक अवसर है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें तत्काल नौकरी की ज़रूरत है। हालांकि, आवेदन करने से पहले इसकी पूरी सच्चाई को समझना बेहद ज़रूरी है। यह एक स्थायी सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि कम वेतन वाली एक संविदा भर्ती है, जो आउटसोर्सिंग के बढ़ते चलन का एक उदाहरण है।
अतः, किसी भी भर्ती के ‘बिना परीक्षा सीधी भर्ती’ जैसे आकर्षक नारों से प्रभावित होने से पहले, उसके सेवा अनुबंध, वेतन संरचना और नियोक्ता की प्रकृति को समझना अनिवार्य है। यह भर्ती एक अल्पकालिक अवसर हो सकती है, लेकिन इसे एक स्थायी सरकारी करियर का विकल्प समझना एक भूल होगी।

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