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बिहार फसल सहायता योजना 2026

बिहार फसल सहायता योजना 2026: 5 हैरान करने वाली बातें जो हर किसान को जाननी चाहिए!
Introduction
खेती-किसानी हमेशा से अनिश्चितताओं से भरी रही है, खासकर जब बात मौसम की हो। बेमौसम बारिश, सूखा या कोई और आपदा किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए बिहार सरकार ‘बिहार राज्य फसल सहायता योजना’ चलाती है। लेकिन यह कोई साधारण सरकारी योजना नहीं है। इसके कुछ नियम और प्रक्रियाएं ऐसी हैं जो आपको हैरान कर सकती हैं। यह पोस्ट आपको रबी फसल 2025-26 के लिए जारी इस योजना की 5 सबसे महत्वपूर्ण और अनपेक्षित बातों को सरल भाषा में समझाएगी, ताकि आप इसका पूरा-पूरा लाभ उठा सकें।
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1. नुकसान से पहले आवेदन: यह बीमा नहीं, सहायता है!
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण और हैरान करने वाली बात यह है कि किसानों को फसल में किसी भी तरह का नुकसान होने से पहले ही इसके लिए आवेदन करना होता है। यह इसलिए है क्योंकि यह एक “बीमा” योजना नहीं, बल्कि एक “सहायता” योजना है। इसका उद्देश्य पहले से तैयार रहना है ताकि नुकसान होने पर समय पर मदद पहुंचाई जा सके।
बीमा योजनाएं प्रीमियम लेती हैं और नुकसान का आकलन करती हैं, जबकि यह सहायता योजना पहले से ही संभावित लाभार्थियों की सूची तैयार रखती है ताकि आपदा आने पर मदद तेजी से पहुंचाई जा सके। रबी 2025-26 सीज़न के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 जनवरी 2026 से शुरू हो चुकी है। यह ज़रूरी है कि आप संभावित नुकसान का इंतज़ार किए बिना, समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें। बाद में सहायता पाने के लिए यह पहला और सबसे ज़रूरी कदम है।
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2. सीधे ₹20,000 तक का लाभ: जानिए आपको कितना मिल सकता है
यह योजना किसानों को सीधी आर्थिक सहायता प्रदान करती है। यदि किसी आपदा के कारण आपकी फसल को नुकसान पहुंचता है, तो आपको प्रति हेक्टेयर ₹10,000 की सहायता राशि दी जाएगी। एक किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर तक के लिए इस लाभ को प्राप्त कर सकता है, जिसका मतलब है कि आपको कुल ₹20,000 तक की आर्थिक मदद मिल सकती है। यह राशि सीधे आपके बैंक खाते में भेजी जाती है, जो मुश्किल समय में एक बड़ी राहत हो सकती है।
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3. सिर्फ ज़मीन के मालिक ही नहीं, बटाईदार किसान भी हैं पात्र
अक्सर सरकारी योजनाओं का लाभ केवल उन किसानों को मिलता है जिनके पास अपनी ज़मीन होती है। लेकिन बिहार फसल सहायता योजना इस मामले में अलग है। यह तीन तरह के किसानों को कवर करती है:
• रैयत किसान: वे किसान जो अपनी खुद की ज़मीन पर खेती करते हैं।
• गैर-रैयत किसान: वे किसान जो दूसरों की ज़मीन पर खेती करते हैं (बटाईदार या किराये पर खेती करने वाले)।
• रैयत एवं गैर-रैयत: वे किसान जो अपनी ज़मीन के साथ-साथ दूसरों की ज़मीन पर भी खेती करते हैं।
यह समावेशी दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि बटाई पर खेती करने वाले किसान भी सरकारी सहायता से वंचित न रहें, जो इस योजना की एक बहुत बड़ी खूबी है।
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4. कागजी दस्तावेजों की जरूरत नहीं: प्रक्रिया हुई आसान
अक्सर ऑनलाइन आवेदन करते समय दस्तावेज़ अपलोड करना एक बड़ी परेशानी होती है। इस योजना ने इस प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। शुरुआती ऑनलाइन आवेदन के समय आपको जमीन के कागजात जैसे कोई भी दस्तावेज़ स्कैन करके अपलोड करने की ज़रूरत नहीं है। आपको केवल अपना किसान पंजीकरण संख्या और ज़मीन का विवरण (खाता संख्या, खसरा संख्या) फॉर्म में भरना होता है।
इस चरण में आपको सिर्फ एक चीज अपलोड करनी है, जिसकी जानकारी अगले पॉइंट में दी गई है। बाकी दस्तावेजों को अपलोड करने की ज़रूरत केवल तभी पड़ेगी, जब आपके गाँव या पंचायत को आधिकारिक तौर पर फसल क्षति से प्रभावित घोषित किया जाएगा।
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5. आपका स्मार्टफोन बनेगा सबूत: दो-तीन GPS फोटो हैं ज़रूरी
यह योजना पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करती है। आवेदन करते समय, किसानों को अपने एंड्रॉइड मोबाइल फोन का उपयोग करके अपनी फसल के साथ अपनी दो-तीन GPS-आधारित तस्वीरें अपलोड करनी होती हैं।
यह इसलिए ज़रूरी है ताकि आपके आवेदन और बोए गए क्षेत्र का सत्यापन किया जा सके। भविष्य में जब दावों की जांच होती है, तो यह फोटो एक मज़बूत सबूत के तौर पर काम करता है। एक ज़रूरी सलाह: फोटो खींचने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके फोन की GPS या लोकेशन सर्विस चालू है, ताकि आवेदन में कोई त्रुटि न हो।
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आवेदन की महत्वपूर्ण तारीखें: मौका न चूकें
रबी 2025-26 की अलग-अलग फसलों के लिए आवेदन की अंतिम तिथियां नीचे दी गई हैं। समय रहते आवेदन करें ताकि आप इस अवसर से चूक न जाएं।
फसल का नाम
आवेदन की अंतिम तिथि
गेहूं
28 फरवरी 2026
रबी मकई
28 फरवरी 2026
चना
15 फरवरी 2026
मसूर
15 फरवरी 2026
अरहर (रबी)
31 मार्च 2026
राई-सरसों
31 जनवरी 2026
ईख
28 फरवरी 2026
प्याज (रबी)
15 फरवरी 2026
आलू
31 जनवरी 2026
टमाटर (रबी)
28 फरवरी 2026
बैंगन
28 फरवरी 2026
मिर्च
31 मार्च 2026
गोभी
31 मार्च 2026
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Conclusion
बिहार राज्य फसल सहायता योजना एक दूरदर्शी और किसान-हितैषी पहल है, जो पारंपरिक बीमा योजनाओं से कहीं ज़्यादा सुलभ और व्यावहारिक है। इसका proactive दृष्टिकोण, बटाईदार किसानों को शामिल करना और सरल आवेदन प्रक्रिया इसे खास बनाती है। इन 5 महत्वपूर्ण बातों को समझकर आप न केवल आसानी से आवेदन कर सकते हैं, बल्कि योजना का अधिकतम लाभ भी उठा सकते हैं।
अब सवाल यह है कि, समय पर जानकारी और सही आवेदन प्रक्रिया को अपनाकर क्या किसान अपनी खेती से जुड़े जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं?

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