बिहार में मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना हुआ बेहद आसान: ये 5 नए नियम आपका समय और पैसा दोनों बचाएंगे!
परिचय
भारत में सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना और लंबी कागज़ी कार्यवाही से जूझना एक आम अनुभव रहा है, खासकर जब विवाह प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बनवाने की बात आती हो। घंटों लाइन में लगना, कई बार दफ्तर जाना और अनगिनत दस्तावेज़ जमा करना – यह प्रक्रिया कई लोगों के लिए सिरदर्द बन जाती थी। लेकिन अब बिहार में यह सब बदल गया है।
लेकिन यह डिजिटल इंडिया की उस लहर का प्रमाण है जो धीरे-धीरे सरकारी सेवाओं का चेहरा बदल रही है, और बिहार इस बदलाव में एक बड़ा कदम उठा रहा है। बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने, विभाग के सचिव अजय यादव के स्पष्ट निर्देशों के तहत, विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के अंतर्गत इस प्रक्रिया को सुगम बनाया है। अब आप घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और पूरी प्रक्रिया कुछ आसान स्टेप्स में पूरी हो जाती है। इस लेख में हम उन 5 सबसे बड़े और फायदेमंद बदलावों के बारे में जानेंगे जिन्होंने इस मुश्किल काम को अविश्वसनीय रूप से आसान बना दिया है।
1. कागज़ी कार्यवाही का झंझट खत्म: अब कोई हार्ड कॉपी या एफिडेविट नहीं!
सबसे बड़ी खुशखबरी और राहत की बात यह है कि अब आवेदकों को अपने दस्तावेज़ों की फिजिकल हार्ड कॉपी दफ्तर में जमा करने की कोई ज़रूरत नहीं है। आपका रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेज़ों के आधार पर ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा, एक और बड़े बदलाव के तहत शपथ पत्र (Affidavit) जमा करने की अनिवार्यता को भी पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।
इतना ही नहीं, अगर आपके आवेदन में कोई गलती हो जाती है, तो उसे सीधे खारिज नहीं किया जाएगा। कर्मचारी ऑनलाइन ही उसे सुधार के लिए आपके डैशबोर्ड पर वापस भेज देंगे, जिसे आप ठीक करके दोबारा जमा कर सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया को और भी चिंता-मुक्त बनाता है।
राज्य में विवाह निबंधन के लिए अब लोगों को बार-बार कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा और ना ही कोई डॉक्यूमेंट की हार्ड कॉपी आपको जमा करना कंपलसरी रहेगा।
2. सिर्फ एक बार ऑफिस जाना है, बस!
पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया में आपको केवल एक बार निबंधन कार्यालय जाने की आवश्यकता होगी। यह पहले की व्यवस्था के बिल्कुल विपरीत है, जहाँ लोगों को कई-कई बार दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते थे।
यह एकमात्र विज़िट आपके द्वारा खुद चुने गए अपॉइंटमेंट की तारीख और समय पर होगी। इस दिन, विवाहित जोड़े को अपने तीन गवाहों के साथ शारीरिक सत्यापन (Physical Verification) के लिए उपस्थित होना होता है। सबसे खास बात यह है कि आवेदन से लेकर अपॉइंटमेंट तक, हर कदम पर आपको SMS के ज़रिए जानकारी मिलती रहेगी, ताकि आप हमेशा अपनी एप्लीकेशन के स्टेटस से अपडेट रहें।
3. हाथों-हाथ मिलेगा सर्टिफिकेट, कोई इंतज़ार नहीं
शायद सबसे प्रभावशाली बदलावों में से एक यह है कि विवाह प्रमाण पत्र अब आपको फिजिकल वेरिफिकेशन वाले दिन ही “हाथों-हाथ” दे दिया जाता है। आपको प्रमाण पत्र के लिए हफ्तों या महीनों का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।
जिस दिन आप अपने गवाहों के साथ कार्यालय जाते हैं, उसी दिन आपकी फोटो ली जाएगी और तुरंत बाद आपको आपका सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा।
उसी दिन निबंधन प्रमाण पत्र हाथों हाथ दे दिया जाएगा।
4. शादी का कार्ड भी अनिवार्य नहीं
अक्सर लोगों को यह चिंता रहती थी कि शादी को साबित करने के लिए कौन-से दस्तावेज़ देने होंगे। अब इस नियम को भी सरल बना दिया गया है। विवाह के प्रमाण के रूप में शादी का निमंत्रण कार्ड (Wedding Invitation Card) जमा करना अब अनिवार्य नहीं है।
ऑनलाइन फॉर्म में इसे अपलोड करने का विकल्प तो है, लेकिन उस पर स्टार का निशान नहीं है, जिसका मतलब है कि यह वैकल्पिक है। इससे उन जोड़ों के लिए प्रक्रिया आसान हो गई है जिनकी पारंपरिक शादी नहीं हुई है या जिनके पास कार्ड उपलब्ध नहीं है। आपको केवल पहचान पत्र (आधार, पैन), निवास प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र (10वीं की मार्कशीट, पैन कार्ड) और दूल्हा-दुल्हन की तस्वीरें जैसे ज़रूरी दस्तावेज़ ही अपलोड करने होंगे।
5. सिर्फ ₹450 की पारदर्शी फीस, सब कुछ ऑनलाइन
इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक निश्चित और पारदर्शी शुल्क संरचना तय की गई है। कुल खर्च मात्र ₹450 है, जिसमें कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं है।
इस शुल्क को दो भागों में बांटा गया है: शुरुआती ऑनलाइन आवेदन के समय आपको ₹100 का भुगतान करना होता है, और बाकी के ₹350 का भुगतान फाइनल सर्टिफिकेट के लिए किया जाता है। और सबसे शानदार बात तो यह है कि पूरा भुगतान ऑनलाइन ही करना होता है, जिससे दफ्तर में नकद लेन-देन की कोई ज़रूरत नहीं पड़ती और प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहती है।
निष्कर्ष
बिहार की यह पहल सिर्फ एक प्रक्रिया का सरलीकरण नहीं है, बल्कि यह इस बात का एक जीता-जागता उदाहरण है कि जब सरकार नागरिक-केंद्रित सोच के साथ तकनीक को अपनाती है तो कैसे सालों पुरानी समस्याओं का अंत किया जा सकता है। इन नए नियमों ने बिहार में विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया में क्रांति ला दी है, इसे एक कुशल, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल (user-friendly) प्रक्रिया बना दिया है।
यह बड़ा सरलीकरण टेक्नोलॉजी के माध्यम से सुशासन की शक्ति को दर्शाता है। आप अगली कौन सी सरकारी सेवा को इसी तरह बदलते हुए देखना चाहेंगे?